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वैदिक प्रवचन - आर्य समाज कीर्ति नगर दिल्ली

ईश्वर कृपा से आध्यात्मिक ज्ञान के सागर , सन्यासी स्वामी विवेकानंद परिव्राजक जी के वैदिक प्रवचन सुनने का सुअवसर मिला रहा है। 5 सत्र हो चुके हैं। 24-4-17 से सुबह एवम् सायं प्रतिदिन 1 घंटे के योग शिविर से बहुत नया ज्ञान मिला। 
तीन वस्तुएं अनादि है, ईश्वर, आत्मा, एवम् प्रकृति। ईश्वर के आनंद के लिए शुद्ध निष्काम कर्म, शुद्ध उपासना, एवम् शुद्ध ज्ञान का होना आवश्यक है। शुद्ध ज्ञान अर्थात ईश्वर कैसा है, उसके गुण कर्म,स्वभाव क्या हैं। आत्मा के गुण कर्म स्वभाव क्या हैं। इस थोड़े सुख एवम् अधिक दुःख देने वाले संसार से मुक्ति, मोक्ष मार्ग पर कैसे चले, जन्म मृत्यु के चक्र से कैसे छूटें। इन विषयों पर चर्चा,वैदिक विचार , ज्ञान वृद्धि हो रही है। 

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