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दर्शन योग साधना आश्रम

अभ्युदय (लौकिक उपलब्धियाँ) और निःश्रेयस (मोक्ष) वैदिक भारतीय संस्कृति की विरासत है और इसको आत्मसात् किए बिना मानव जीवन की सफलता असम्भव है। अतः इसकी रक्षा और वृद्धि हम सबका एक अनिवार्य कर्त्तव्य बन जाता है।

            इसी उद्देश्य से दर्शन योग धर्मार्थ ट्रस्ट, आर्यवन, रोजड, गुजरात की ओर से ‘दर्शन योग साधना आश्रम’ के नाम से एक नई और विशिष्ट योजना का शुभारम्भ दिनांक ३०/१०/२०१६ को गीता प्रादुर्भाव की पुण्यभूमि कुरुक्षेत्र, हरियाणा से किया गया है । वहाँ तीन बीघा भूमि है उसमें 4 साधना कुटिरों का निर्माण किया गया है। वर्तमान में उच्चस्तरीय साधना का अनुष्ठान आरम्भ हो गया है । अब तक इस पुनीत कार्य में लगभग 50 लाख रुपये राशि व्यय हो चुकी है । तथा दर्शन योग महाविद्यालय के  आचार्य विद्वान आदि उच्चस्तरीय योग साधना कर रहें हैं ।    

            हमारा प्रयास यह भी है कि यह लाभ सर्वसाधारण को भी मिले । अतः इसके लिए भिन्न भिन्न स्थानों में भिन्न स्तरों पर साधना आश्रम का निर्माण करने की हमारी योजना है । जिसमें आयुष्मान पुरुषों, माताओं को ऐसा विशेष वातावरण-युक्त स्थान मिलेगा, जहाँ पर वे निश्चिन्त होकर पूरे मनोयोग से आजीवन या लम्बी साधना कर सकेंगे । इसके साथ नई पीढ़ी को भी विद्याप्राप्ति हेतु समुचित वातावरण उपलब्ध हो सकेगा । अन्य साधारण धार्मिक जनों के लिए भी निरन्तर कार्य होते रहेंगे ।

            इस अभीष्ट लक्ष्य की सिद्धि के लिए सामूहिक साधना कक्ष, कार्यालय, पुस्तकालय, संग्रहालय, स्वागत कक्ष, भोजनालय, यज्ञशाला, अतिथिशाला, गौशाला, कर्मचारीगृह, साधक कुटिर, आचार्य निवास, नलकूप, कृषि यन्त्रालय, पुष्पवाटिका, औषधिवन आदि के लिए पर्याप्त स्थान और भवन की आवश्यकता है । जो परियोजना के अंतर्गत हैं ।

            सुहृद आर्यमहानुभावो ! इसमें आपका मनोबल, कार्यबल तथा अर्थबल का श्रद्धा और स्नेह सहित सहयोग अपेक्षित है । आप प्रथम अपने हृदय में इस योजना को स्थान दें, तदुपरान्त यथा सामर्थ्य सहयोग देकर इस पुनीत कार्य को सफल बनावें। इसके लिए हम आपके नितान्त आभारी रहेंगे ।