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आध्यात्मिक सरोवर गुजराती

साहित्य समीक्षाः ● ग्रन्थ का नाम – ‘अध्यात्म सरोवर’ (दोनों भाग का गुजराती अनुवाद) ● ----------------------- दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़ के वर्तमान आचार्य स्वामी ब्रह्मविदानन्द सरस्वती जी (पूर्वाश्रम का नाम - ब्रह्मचारी सुमेरुप्रसाद जी दर्शनाचार्य) ने कई वर्ष पूर्व स्वामी सत्यपति जी परिव्राजक, आचार्य ज्ञानेश्वर जी तथा स्वामी विवेकानन्द जी परिव्राजक के अमूल्य आध्यात्मिक तथा दार्शनिक उपदेशों को संगृहीत कर इस ‘अध्यात्म सरोवर’ नामक उत्तम ग्रन्थ को हिन्दी में दो भागों में तैयार किया था । हिन्दी पाठकों ने इस ग्रन्थ को बहुत पसन्द किया और प्रकाशक संस्था ने इसे अनेक बार प्रकाशित किया । मुझे यह ‘अध्यात्म सरोवर’ ग्रन्थ बहुत उपयोगी लगा । इसके पठन से मुझे कई सूक्ष्म बातें ठीक से समझ में आईं । मैंने इसके प्रथम भाग का गुजराती अनुवाद तो उसी समय तैयार कर लिया था जिसे १९९९ में दर्शन योग महाविद्यालय ने प्रकाशित किया । २००६ में इस प्रथम भाग के गुजराती अनुवाद को पुनः प्रकाशित किया गया । दूसरे भाग का अनुवाद भी लगभग दस वर्ष पूर्व मैंने तैयार कर लिया था परन्तु उसे अब (जून २०१७ में) प्रथम भाग के साथ-साथ अर्थात् एक ही वॉल्यूम में सुन्दर आकार-प्रकार में ‘दर्शन योग धर्मार्थ ट्र्स्ट', रोजड़ द्वारा प्रकाशित किया गया है । ग्रन्थ में कुल ३०६ पृष्ठ हैं और मूल्य है ११० रुपिये । ग्रन्थ के आरम्भ में दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़ के निदेशक स्वामी विवेकानन्द जी परिव्राजक का ‘आशीर्वचन’ दिया गया है । इस ग्रन्थ में मानव जीवन का लक्ष्य, आदर्श, अनुकरण, पात्रता, एकाग्रता, पुरुषार्थ, परोपकार, नास्तिकता, लौकिक-आध्यात्मिक भेद, योगी, एषणा, स्व-स्वामी सम्बन्ध, सत्य-असत्य, वाणी का सदुपयोग, क्रियात्मक योगाभ्यास, योगाभ्यासी के कर्तव्य, साधक-बाधक, उन्नति के उपाय, अन्तर्ध्वनि, निराशा-विनाश, दुःख, भय, अहंकार, आन्तरिक कार्य, विवेक-वैराग्य, आध्यात्मिकता, संस्कार, मन, आत्म-निरीक्षण, ईश्वर-प्रणिधान और उपासना – ये प्रकरण हैं । पूरा ग्रन्थ विचार प्रधान है और वैदिक अध्यात्म जीवन दर्शन की श्रेष्ठ मीमांसा प्रस्तुत करता है । आशा है कि गुजराती जानने वाला जिज्ञासु वर्ग इस ग्रन्थ का स्वागत करेंगा और इसके स्वाध्याय से स्वयं लाभान्वित होगा और अन्य को भी लाभान्वित करने का प्रयास करेगा । भावेश मेरजा ●●●